सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

हेंह, हेंह मोदी ने आखिर किया क्या है ? (पार्ट-2) Achievements Of Modi Govt. in 16 Months

                                                                                                                     ( गतांक से आगे )                                    देश में गरीबों के लिए पहली बार :                                                                        कवच, कौशल और कर्ज तीनों एक साथ        


पिछले अंक मे आपने पढ़ा मोदी की कुछ असाधारण एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां, इस अंक मे प्रस्तुत है मोदी द्वारा गरीबों एवं निम्न आय वर्ग के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उठाए गए कुछ कदम। मोदी ने गरीब तथा निम्न आय वर्ग के लोगों को तीन तरह का सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। दो बीमा योजनाएँ एवं एक पेंशन योजना। इसी तरह उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए मोदीने दो अति महत्व पूर्ण हथियार उनके हाथों मे सौंपा है । प्रथम, प्रधान मंत्री कौशल विकाश एवं स्किल इंडिया योजना एवं द्वितीय, गरीबों को बिना किसी जमानत या गिरवी रक्खे कर्ज देने के लिए, मुद्रा बैंक योजना। इस अंक में प्रस्तुत है इन्हीं योजनाओं पर एक सरसरी नजर।    

2॰ मोदी की अति विशिष्ट योजनाएँ एवं उपलब्धियां :
भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ की किसी प्रधान मंत्री ने गरीबों को भी पेन्सन मिलना चाहिए, उनके भी जीवन का बीमा होना चाहिए ताकि असमय मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को कुछ सहारा मिल सके एवं उन्हें भी अचानक कोई दुर्घटना हो जाए जिसमे उसकी मृत्यु हो जाती है या अपंग हो जाए, तो उसे भी कुछ आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिये, ऐसा  न सिर्फ सोंचा बल्कि इस सोंच को वास्तविकता के धरातल पर उतारा   भी । इस तरह की बीमा योजनाएँ व्यापारिक रूप से पहले से ही कई संस्थाओं जैसे भारतीय जीवन बीमा निगम एवं अन्य सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियां चला तो रही हैं, पर इनमें प्रीमियम का दर इतना ज्यादा है कि ज्यातर गरीब, यहाँ तक की मध्य वर्ग का भी एक बहुत बड़ा तबका इसका लाभ नहीं उठा पाता। मोदी सरकार ने इसी वर्ग को लक्ष्य मानकर गरीबों तथा आर्थिक रूप से पिछडों को भी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा कवच देने के लिए निम्न लिखित तीन योजनाओं का शुभारंभ किया है। इन 3 योजनाओं मे पहली, एक आम आदमी को मात्र 330 रु॰ सालाना मे जीवन बीमा प्रदान करती है, दूसरी, मात्र 12 रु॰ सालाना मे दुर्घटना बीमा प्रदान करती है और तीसरी, एक आम नागरिक को भी उसके 60 वें वर्ष से पेंशन प्रदान करती है।  कहना न होगा, शुरू होते ही ये तीनों योजनाएँ जबर्दस्त सफलता हासिल कर रही हैं। 

1. प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना : 

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इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच है, मात्र 330 रुपये प्रति वर्ष के भुगतान पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा प्राप्त कर सकता है। अर्थात बीमा कराये गए अवधि के बीच मे यदि उसकी मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को 2 लाख रुपये प्राप्त होंगे। परंतु इस योजना का लाभ उठाने के लिए शर्त यह है कि आपका जन धन योजना के तहत बैंक में खाता होना चाहिए और आपके खाते से प्रीमियम की रकम स्वत: काट ली जाए इसकी सहमति देनी होगी। इसका मतलब यह हुआ की जन धन योजना के तहत खोले गए बैंक खाते को आप जीरो बैलेंस पर नहीं रख पाएंगे। उस खाते को चालू रखना जरूरी है। कहना न होगा कि इतने कम रकम में गरीबों तथा आर्थिक रूप से पिछड़ों को जीवन सुरक्षा प्राप्त कराना मोदी सरकार का एक उललखनीय ऐतिहासिक कदम है।   
                                        
2॰ प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना :

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एक मजदूर, जो संगठित क्षेत्र के किसी बड़े उद्योग या कल कारखाने में काम करता है, यदि उसकी दुर्घटना में मौत हो जाए या वह अपंग हो जाए तो उसे कल कारखाने से संबन्धित सुरक्षा अधिनियमों के तहत कई तरह के लाभ एवं क्षति पूर्ति प्राप्त करने का हक है, पर असंगठित क्षेत्र का एक गरीब मजदूर जो किसी बिल्डर का ऊंचा मकान बना रहा है, यदि गिरकर उसकी मौत हो जाए या अपाहिज हो जाए तो उसे क्या मिलेगा। कुछ नहीं सिवाय सांत्वना या बहुत हुआ तो कुछ रुपयों की मदद के सिवा। इन्हीं असंगठित क्षेत्र के गरीब मजदूरों को ध्यान में रख कर प्रधान मंत्री सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है।
इस योजना के तहत मात्र 12 रुपये सालाना देकर कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र मे काम करता हो, इस योजना का लाभ उठा सकता है, वशर्ते उसकी उम्र 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इस योजना के तहत यदि उस व्यक्ति की मृत्यु किसी दुर्घटना वश हो जाती है या उस दुर्घटना के कारण वह पूरी तरह अपंग एवं काम करने लायक नहीं रह जाता, तो 2 लाख रुपये तथा यदि आंशिक रूप से अपंग हो जाता है तो 1 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। कहना न होगा कि गरीबों की सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना महत्व पूर्ण कदम है, क्योंकि 12 रुपए की रकम इतनी छोटी रकम है कि एक अत्यधिक गरीब भी इस रकम को आसानी से दे सकता है। 

3. अटल पेन्शन  योजना : 
किसी ने कल्पना किया था कि एक गरीब भी 60 साल के बाद रिटायर होने पर पेंशन प्राप्त कर सकता है। मोदी सरकार ने गरीबों को भी बुढ़ापे में एक सुरक्षा कवच मिले, इस उद्देश्य से अटल बिहारी बाजपेयी जी के नाम पर इस योजना का नामकरण एवं शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 40 के बीच है, इस योजना का लाभ उठा सकता है, पर शर्त यह है कि (1) वह पहले से ही ऐसे ही किसी सवैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य नहीं होना चाहिए, (2) तथा वह इन्कम टैक्स दाता नहीं है, अर्थात उसकी आय इतनी नहीं है कि वह इन्कम टैक्स दे सके। इस योजना में शामिल होने पर सरकार के तरफ से प्रति वर्ष उस व्यक्ति द्वारा दिये गए अंश दान का 50% या 1000 रुपया जो भी कम होगा,उतनी राशि सरकार द्वारा सहायता के रूप में दी जाएगी। यह सहायता सरकार द्वारा 5 वर्षों तक दी जाएगी , अर्थात 2015-16 से शुरू होकर 2019-20 तक, परंतु यहाँ भी एक शर्त यह है कि यह सहायता उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो लोग 2015 दिसंबर तक इस योजना मे सम्मिलित हो चुके होंगे। 
   
                                                                               
                                                                                 
इस योजना के तहत सम्मिलित होने वाले व्यक्ति को जब वह 60 साल का हो जाएगा, तब प्रति माह 1000, 2000, 3000, 4000 या 5000 तक की रकम लाभार्थी को पेंशन के रूप में प्राप्त होगा। यह उस व्यक्ति की आर्थिक क्षमता पर निर्भर है कि वह कितने का पेंशन लेना चाहता है ,क्योकि ज्यादा पेंशन लेने के लिए ज्यादा रकम देना होगा, पर राहत की बात यह है कि सरकार हरेक वर्ष 50% या 1000 तक की सहायता 5 वर्षों तक करती रहेगी। इसके साथ ही अंशदान की रकम इस बात पर भी निर्भर होगी कि वह व्यक्ति किस उम्र में इस योजना मे शामिल हो रहा है। उदाहरण के लिए यदि एक 35 वर्ष का व्यक्ति प्रति माह 5000 रुपये पेंशन के रूप में प्राप्त करना चाहता है तो उसे 902 रु॰ प्रति वर्ष अंशदान के रूप मे 25 वर्षों तक देना होगा। पर यदि वह 18 वर्ष की उम्र मे ही इस योजना मे सम्मिलित होता है तो उसे मात्र 219 रु॰ प्रति माह देने होंगे पर यह रकम उसे 42 वर्षों तक देना होगा। । पेंशन की रकम लाभार्थी को अवश्य मिलेगी, इसकी गारंटी सरकार लेती है। 
उपरोक्त तीनों ही योजनाएँ सुपर डुपर हिट रही हैं तथा लोगों मे इन योजनाओं का लाभ उठाने की होड लग गई है। सितंबर 2015 तक के उपलब्ध डाटा अनुसार अबतक प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना मे 2 करोड़ 83 लाख, प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना मे 8 करोड़ 68 लाख एवं अटल पेंशन योजना मे 7लाख 80 हजार लोग शामिल हो चुके हैं। इन तीनों योजनाओं मे सम्मिलित लोगों की कुल संख्या सितंबर 2015 तक 11 करोड़ 58 लाख तक पहुँच चुकी थी।  

4॰  प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना एवं स्किल इंडिया योजना :   
2014 के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 37 करोड़ लोगों की उम्र 10 से 24 वर्ष के बीच है और जैसा कि मोदी बार बार अपने भाषणों मे कहते रहे हैं देश मे पूरी जनसंख्या का 65% युवा वर्ग का है। इतनी बड़ी युवा शक्ति को यदि अच्छी तरह विभिन्न उद्योग, व्यापार एवं तकनीक से संबन्धित ज्ञान एवं कौशल की शिक्षा दी जाए, उनमे छिपे हुनर का विकास किया जाए, तो इस योजना से न सिर्फ विभिन्न उद्योगों को उनकी आवश्यकता अनुसार यथेष्ट मात्रा मे कारीगर मिल जाएंगे बल्कि बड़ी मात्र में बेरोजगारी दूर करने में भी यह मिल का पत्थर साबित होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान मे रख कर दोनों योजनाएँ शुरू की गई हैं। 
प्रधान मंत्री कौशल विकाश योजना के तहत ऐसे युवक जो कक्षा 10 या 12 मे असफल हो गए, आगे नहीं पढ़ सके या जो निम्न आय वर्ग से आते हैं, ऐसे 24 लाख युवकों को विभिन्न प्रकार के कौशल या हुनर में प्रशिक्षित करने की योजना है।  ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद ऐसे युवकों की परीक्षा भी ली जाएगी एवं उस परीक्षा मे प्राप्त परिणाम अनुसार योग्यता प्राप्ती का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा, ताकि उस सर्टिफिकेट के आधार पर वह नौजवान रोजगार प्राप्त कर सके। इसके अलावा असाधरन योग्यता प्रदर्शित करने वाले युवकों को 8000 रुपए की पुरस्कार राशि भी दी जाती है। 

                              

स्किल इंडिया का उद्देश्य एवं कार्यक्रम का पैमाना दोनों प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना की तूलना मे बहुत बड़ा है। इस योजना का लक्ष्य 2020 तक भारत के एक एक गाँव तथा शहर तक पहुंचाना तथा इनमें रह रहे कम से कम 50 करोड़ युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे न सिर्फ भारत बल्कि जर्मनी, जापान, चीन, अमेरिका तथा विश्व के अन्य देशों के तकनीकी क्षमता से सम्पन्न कारीगरों की मांग की भी आपूर्ति कर सकें। इस योजना के तहत दिया जाने वाला कौशल प्रशिक्षण न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर बल्कि नवीनता की खोज आधारित भी होगा। प्रशिक्षण कोर्स बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रक्खा गया है कि देश में तथा विदेशों मे भी किस तरह के कारीगरों की ज्यादा मांग है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद चाहें तो ये युवा अपने खुद का कारख़ाना या अन्य व्यापार भी शुरू कर सकेंगे क्योकि इन्हें एक सफल उद्द्यमी बनने के गूढ रहस्य की भी शिक्षा दी जाएगी।  कहना न होगा कि ये दोनों ही योजनाएँ देश मे बेरोजगारों कि बढ़ती संख्या को कम करने मे महत्व पूर्ण भूमिका अदा कारेगी। 

5॰  मुद्रा बैंक  Micro Units Development & Refinance Agency :   
    ( गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे महत्व पूर्ण ब्रह्मास्त्र )

देश मे यह पहली बार हुआ है कि गरीबों तथा निम्न आय वर्ग के लोगों को आर्थिक सुरक्षा कवच, कौशल प्रशिक्षण तथा कर्ज तीनों एक साथ दिया जा रहा है। कौशल प्राप्त हो जाने के बाद, एक युवा निवेशक यदि अपने खुद का कोई उदद्योग या व्यापार शुरू करना चाहे तो उसे बिना किसी बाधा के बैंकों से कर्ज मिलना जरूरी है। न सिर्फ युवा उद्द्यमी बल्कि देश मे ऐसे करोड़ो करोड़ लोग हैं, जो छोटे छोटे व्यापार या उदद्योग मे लगे हुए हैं,पर लगभग रोज हीं अपने कर्ज की आवश्यकताओं के लिए बैंकों के पास न जाकर, सूदखोर साहूकारों (Money lenders) से बहुत ही ऊंचे व्याज दर पर कर्ज लेकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति कर रहे हैं। सब्जी

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बैंचने वाला, ठेला लगाने वाला, गलियों मे फेरि लगाने वाले, चाय का स्टाल चलाने वाले,अपना रिक्शा या ऑटो रिक्शा चलाने वाले, महिलाएं जो सिलाई या बियूटी पार्लर चलना चाहती हैं, ऐसे करोड़ो लोग हैं जिन्हे देश के बैंकिंग प्रणाली से कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं मिलता और इसमे जो सबसे बड़ा कारण है वो है - बैंकों द्वारा बिना जमानत के कर्ज न देना। मजबूरन छोटे छोटे धंधों मे लगे ये लोग, साहूकारों से ऊंचे व्याज पर कर्ज मिलने के बावजूद उन्हीं के पास जाने को मजबूर हैं क्योंकि साहूकार उनसे जमानत नहीं मांगते । नतीजा यह होता है कि वो जो भी कमाते हैं, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा सूदखोरों के पास चला जाता है और उनकी दयनीय स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है।  मोदी सरकार ने इसी वर्ग की जरूरतों को ध्यान मेँ रख मुद्रा बैंक की स्थापना की है। अंग्रेज़ी मे इस बैंक का नाम है : Micro Units Development & Refinance Agency । अँग्रेजी के इन्हीं शब्दों के प्रथम अक्षर को जोड़ कर नाम पड़ा है - मुद्रा बैंक। 

                                 

यह बैंक देश मे पहले से ही स्थापित सिडबी (small Industries Development Bank of India ) एसआईडीबीआई के सब्सिडियरी के रूप मे काम करेगा। प्रधान मंत्री मोदीजी ने 8 अप्रैल 2015 को इस योजना का  प्रारम्भ 20,000 करोड़ की प्राथमिक पूंजी से किया था। इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य है गांवों, सुदूर पिछड़े क्षेत्रों मे रहने वालों तथा निम्न आय वर्ग के ऐसे लोग जो देश की बैंकिंग व्यवस्था के लाभ से वंचित हैं, उन लोगों तक बैंको से मिलने वाली सारी सुविधाएं जैसे,विभिन्न तरह की बीमा योजनाएँ एवं कम व्याज दर पर, बिना किसी स्थायी संपत्ति जमानत में रक्खे, विभिन्न प्रकार के अति लघु उदद्योगों या व्यापार के लिए कर्ज मुहैया कराना । इस योजना के तहत तीन तरह का कर्ज देने की व्यवस्था की गई है। 
1॰ शिशु ऋण     :              50,000 तक की रकम ।
2. किशोर ऋण  :         50,000 से 5 लाख तक की रकम । 
3. तरुण ऋण    :             5 लाख से 10 लाख तक । 
भविष्य में इस योजना के तहत मुद्रा कार्ड देने, क्रेडिट गारंटी एवं क्रेडिट में वृद्धि आदि का भी प्रावधान करने की संभावना है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मार्च 2016 तक 2 करोड़ जरूरतमन्द लोगों को उनके उदद्योग, व्यापार में निवेश के लिए 1.22 करोड़ रुपये कर्ज के रूप मे देने का लक्ष्य है। इस योजना की सफलता के लिए प्रधान मंत्री स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं। देश के विभिन्न बैंकों ने अप्रैल से अबतक लगभग 22लाख लोगों को 29,000 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दे चुके हैं तथा इस रकम मे से करीब 9,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने वालों के बीच वितरण भी किया जा चुका है। इस योजना की सफलता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुत बड़ी मात्र मे महिलाएं भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आ रही हैं। कोई ब्यूटी पार्लर के लिए, तो कोई भैस खरीदने के लिए, तो कोई ट्यूशन सेंटर खोलने के लिए, बड़े पैमाने पर महिलाओं को भी इस योजना मे काम शुरू करने की प्रेरणा मिल रही है। इसी तरह अति छोटे छोटे व्यापार मे लगे लोग, जैसे सब्जी बेचने वाले, ठेला पर सामान बेचने वाले, चाय का स्टाल लगाने वाले आदि भी बड़ी मात्रा मेँ इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। 2013 मे किए गए एक सर्वे के अनुसार देश मे लगभग 5.70 करोड़ ऐसे लघु उद्द्यमी तथा छोटे व्यापारी हैं, जिन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने मेँ अत्यधिक कठिनाई होती है, क्योंकि बैंक बिना किसी जमानत के कर्ज देना नहीं चाहते। उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं दिया गया कर्ज डूब न जाए। मुद्रा बैंक इसी समस्या का समाधान लेकर आया है तथा अब बिना किसी जमानत के ऐसे करोड़ों अति लघु तथा लघु व्यापारियों, उद्द्यमियों को कर्ज मिलना  आसान हो गया है, जो पहले बैंकों से कर्ज न मिल पाने के कारण सूदखोरों तथा  साहूकारों पर आश्रित थे।
उपरोक्त पांचों योजनाओं को यदि संयुक्त रूप से देखा जाए तो इसमे कोई शक नहीं कि आने वाले भविष्य में ये भारत का चेहरा बदलने वाली योजनाएँ सिद्ध होंगी । ये योजनाएं भारत से गरीबी मिटाने, बड़ी मात्रा मे गरीबों को आत्म निर्भर बनाने एवं देश से बेरोजगारी हटाने में मील का पत्थर साबित होंगी। 
                                                                                                 
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सोमवार, 28 सितंबर 2015

हेंह, हेंह, आखिर मोदी ने किया क्या है ? (पार्ट-1) Achievements Of Modi Govt. in 16 Months





मोदी ने अभी तक जो भी achieve किया है,उन उपलब्धियों की महत्ता के अनुसार मैंने उन्हें दो श्रेणीयों में बाँट दिया है। 1॰ असाधारण एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां 2. अति विशिष्ट उपलब्धियां। प्रस्तुत है मोदी की दोनों हीं तरह कि उपलब्धियां दो अंकों में । इस अंक में प्रस्तुत है मोदी की -  

1॰ असाधारण एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां

1॰  बंगलादेश के साथ 40 वर्षों से भी ज्यादा समय से आधार में लटका सीमा अदला बदली सम्झौता

मात्र इस एक सम्झौते के कारण मोदी को भारत - बंगला देश के इतिहास में हमेशा याद रक्खा जाएगा। 
 
India, Bangladesh Sign Historic Deal That Ends Border Disputes Between the 2 Nations

इस एक समझौते ने न सिर्फ बंगला देश के साथ रिश्तों मे एक नई गरम जोशी एवं ठहराव पैदा किया है, बल्कि भारत, भूटान, बंगला देश एवं म्यांमार कॉरीडोर का मार्ग भी प्रशश्त कर दिया है । इस समझौते की महत्ता न सिर्फ आर्थिक बल्कि भारत की सुरक्षा के दृष्टि से भी अमूल्य है। पिछले 40 वर्षों से बॉर्डर की यह समस्या लंबित थी। मनमोहन सरकार ने भी इस समस्या का हल निकालने तथा समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास किया था, पर उन्हें इस में सफलता नहीं मिली। मोदी ने न सिर्फ ममता बनर्जी को अपने विश्वास में लिया बल्कि समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के लिए अपने साथ बंगला देश ले जाने में भी सफल रहे।  

2॰  कोयला खदानों के आबंटन से 4 लाख करोड़ से भी ज्यादा का राजस्व संग्रह  : 
याद करें मनमोहन सिंह का सोनिया अधशाशित UPA 2 का काल खंड । भारत के सारे कोयला के खदानों को मुफ्त मे सोनिया तथा कांग्रेस के चहेतों के बीच बाँट दिया गया। सरकार के खजाने में एक पैसा नहीं आया।

 

अरबों रुपये की घूसख़ोरी हुई पर कांग्रेस कहती रही कोई घपला नहीं हुआ है। मोदी सरकार के आने के बाद पूरी खदान आवंटन की प्रक्रिया को बदला गया एवं इसे नीलामी प्रक्रिया से जोड़ा गया। मनमोहन सरकार को भी यह प्रक्रिया सुझाया गया था पर सोनिया के दबाव मे उसे नही लागू किया गया और बिना कोई तार्किक प्रक्रिया अपनाए अपने चहेतों मे सारा खदान बाँट दिया गया। मैं इसे मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानता हूँ। मात्र 67 खदानों की नीलामी से मोदी सरकार ने लगभग 4 लाख करोड़ से भी ज्यादा की रकम जुटा लिया, जबकि अभी भी कुछ खदान सरकार के पास नीलामी के लिए बाँकी है। भारत को जहा एक पैसा भी इन खदानों से नहीं मिल रहा था, वहीं मोदी द्वारा 4 लाख करोड़, जो किसी भी पैमाने पर एक बहुत बहुत बड़ी (huge) रकम है, इकट्ठा कर लेना, न सिर्फ इस सरकार की ईमानदारी का सबसे बड़ा प्रमाण है, बल्कि एक असाधारण उपलब्धि भी है।  

3॰ 2 जी तथा अन्य स्पेक्ट्रम की नीलामी से 1लाख 9 हजार 874 करोड़ का राजस्व संग्रह : 
याद करें कपिल सिब्बल का 2जी घोटाला के विषय मे शून्य लॉस (0 loss) वाला वयान। पहले आओ पहले पाओ के सिद्धान्त की आड़ में मनमोहन सरकार ने सारे 2जी स्पेक्ट्रम अपने चहेतों के बीच औने पौने दाम पर आवंटित किया था। करोड़ो करोड़ के घूस का लेन देन हुआ। सोनिया निर्देशित मनमोहन सिंह की कठपुतली सरकार कहती रही कोई लॉस नहीं हुआ है। पर बाद में इसी कारण ए राजा एवं कई अन्य नेताओं को जेल भी जाना पड़ा। अभी भी केश चल ही रहा है । 
                     
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मोदी की नई सरकार आई और इसने उन्हीं स्पेक्ट्रमों की नीलामी कर 1,09,874 करोड़ रुपया जुटाया जो कोयला की तरह ही एक असाधारण रूप से बड़ी रकम है। इस सरकार ने दिखाया कि कपिल सिब्बल जैसे भ्रष्ट नेता कितना बड़ा झूठ बोल रहे थे। सरकार यदि ईमानदार हो तो क्या हो सकता है, मोदी सरकार की उपरोक्त दोनों उपलब्धियां इसी का उदाहरण है. 

4॰ प्रधान मंत्री जन धन योजना : गिनीज़ वर्ल्ड रेकर्ड 
गरीबों को बैंकिंग नेट वर्क से जोड़ने की इस अद्भुत योजना का आज पूरी दुनिया कायल है। पिछले वर्ष 15 अगस्त को इस योजना का ऐलान मोदी ने लाल किले से किया था । मात्र 5 महीने में ही कुल 11करोड़ 50 लाख एकाउंट खोले गए जो एक वर्ल्ड रेकर्ड है, जिसे गिनीज वालों ने भी अपने वर्ल्ड रेकर्ड में दर्ज किया है। इस योजना के तहत अगस्त 2015 तक18 करोड़ 34 लाख लोगों का खाता खुल चुका है एवं करीब 24 हजार 72 करोड़ रुपया अगस्त तक एवं 32000 करोड़ रुपये सितंबर तक लोगों ने इन खातों मे जमा कराया है। न सिर्फ इतनी बड़ी संख्या में गरीबों को बैंक के नेट वर्क से जोड़ने बल्कि इतनी बड़ी रकम बैंक खातों मे गरीबों द्वारा जमा कराया जाना, दोनों ही भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब सरकार द्वारा गरीबों के उत्थान के लिए चलाए जाने वाले किसी भी योजना का लाभ सरकार सीधे गरीबों के खाते में पहुँचा सकती है। पहले दिल्ली से चले एक रूपया में से,एक अध्ययन के अनुसार, सिर्फ 15 पैसा गरीबों तक पहुंचता था, पर अब सौ का सौ प्रतिशत रकम गरीबों तक पहुँचने का मार्ग प्रशश्त हो गया है।
                             
                                                   
 
इन खातों से गैस  सिलिन्डर पर दी जाने वाली सब्सिडी एवं अन्य योजनाओं का लाभ भी सीधे  गरीबों के खाते मे पहुँच रहा है । पहले के सिस्टम मे गरीबों का पैसा बीच मे ही बिचौलिये खा जाते  थे, पर अब नहीं। एक गणना के अनुसार इस योजना में पूर्व के मनमोहन सरकार के समय हो रहे भ्रष्टाचार के कारण लगभग 18000 करोड़ रुपये की गैस सब्सिडी जिसे भारत सरकार प्रत्येक सिलिन्डर पर देती है, वह बीच मे ही बिचौलिये खा जाते थे। पर आधार एवं जन धन बैंक एकाउंट के माध्यम से मोदी सरकार इस 18000 करोड़ के लूट को रोकने में सफल हुई है। सबसे बड़ी बात ये कि सरकार कि अन्य योजनाओं का लाभ भी अब गरीब सीधे उठा सकेंगे । सरकार एवं गरीबों के बीच जन धन बैंक एकाउंट के माध्यम से सीधा संपर्क स्थापित हो जाने के कारण गरीबी उन्मूलन एवं उन्हें स्वावलंबी बनाने की बहुत सारी सरकारी योजनाओं को कारगर ढंग से लागू करना अब आसान हो गया है। आने वाले समय मे यह एक गेम चेंजर योजना साबित होगी।

5॰ विदेशों में भारत की नई पहचान : सबसे तेज गति से विकास की ओर बढ़ता, विश्वास से लबालब, 
एक अत्यन्त शक्तिशाली, दूर द्रष्टा एवं शुद्ध भारतीय नेतृत्व मे नई ऊंचाइयों को छूता भारत : 
ये मोदी का ही कमाल है कि मात्र 16 महीने में भारत की छवि जो एक निकम्मी, कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में अक्षम, भ्रष्टाचार की जननी, देश की रक्षा एवं विदेश नीति, दोनों मे बुरी तरह असफल, आर्थिक सुधारों को गति देने में नाकाम, दिन प्रति दिन सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती महंगाई (2013 में 10.92) पर लगाम लगाने में बुरी तरह विफल, लगातार गिरते GDP ग्रोथ रेट (8.4 से घट कर 4॰7) को रोकने में असफल अर्थात पूरी दुनिया में एक (Failed Nation) असफल राष्ट्र की जो छवि बन गई थी, उसे बदलने मे कामयाब हुए हैं। यह अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है क्योंकि किसी देश की छवि मात्र एक या दो उपलब्धियों के आधार पर नहीं बदलती। बल्कि अर्थ व्यवस्था के सारे प्रचलित मान दण्ड चुस्त दुरुस्त होने चाहिए। मात्र 16 महीनों मे मोदी ने भारतीय अर्थ व्यवस्था को नया आयाम दिया है। आज महंगाई दर 10.92 से घट कर जुलाई 2015 तक के डाटा अनुसार 4.37 पर आ चुका है और लगातार घट रहा है। थोक महंगाई दर तो 2015 जुलाई तक के डाटा अनुसार गिरकर - 4.05 तक पहुँच चुका है। माइनस में थोक सूचकांक का पहुँचना अपने आप मे एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। जहां तक जीडीपी ग्रोथ रेट का प्रश्न है, आज दुनिया की लगभग सभी रेटिंग एजेंसियां भारत को सबसे तेज गति से बढ्ने वाली अर्थ व्यवस्था मान रही हैं। वर्ल्ड बैंक के अनुमान अनुसार 2015-16 में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 से 8% तक रहने का अनुमान है जो चीन के ग्रोथ रेट से भी ज्यादा है।


प्रशासन एवं अर्थ व्यवस्था के अन्य माप दंडों पर भी इस सरकार ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विदेश नीति में लगभग सभी पडोसी देशों के साथ, सिर्फ पाकिस्तान को छोडकर, फिर से एक नए विश्वास एवं सहयोग की स्थापना, दुनिया के लगभग सभी समृद्ध एवं शक्तिशाली देशों के साथ भारत में पूंजी निवेश के लिए सम्झौता,यहाँ तक की संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देश जिन्हें पाकिस्तान के साथ ज्यादा नजदीक समझा जाता था,उनके साथ भी भारत में एक बहुत ही बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश का सम्झौता, इतना ही नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भी मिलकर लड़ने तथा एक दूसरे को सहायता करने का सम्झौता, भारत की कूटनीति एवं विदेश नीति की ऐतिहासिक सफलताओं में से एक है। दुनिया आज भारत की ओर फिर से देख रहा है। विश्व की लगभग सारी बड़ी कंपनियाँ जो पिछले साल तक भारत को एक असफल देश मान चुकी थीं, आज पूंजी निवेश के लिए कतार में खड़ी हैं। ये है मात्र 16 महीने में मोदी का जादू ।  
( मोदी की अन्य विशिष्ट उपलब्धियां अगले अंक में .... )
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रविवार, 20 सितंबर 2015

गुरु मंत्र

               विद्या हीं समृद्धि एवं सुख का द्वार है   


Sanskrit literature is a treasure house of such ancient wisdom which ignites the minds of human beings and guides them towards how to achieve their goal. Here is a guru mantra on what is the secret of removing poverty and how to achieve wealth and happiness in life.            

                        

                         


                                      विद्या ददाति विनयम् ,   विनयाद्याति पात्रताम्   । 
                                     पात्रत्वाम्  धनमाप्नोती,   धनात् धर्मम् तत: सुखम्  ।। 
                                                                                                  
Education, learning, and/or knowledge makes a person humble, courteous॰ Humility provides him ability and opportunity to earn. Ability to earn leads him to riches and wealth. From wealth to dharma and then to happiness and a fruitful life , this is how a person reaches to his ultimate goal. 

विद्या हमें विनम्रता प्रदान करती है। विनम्रता से हममें सीखने की क्षमता, पात्रता का विकास होता है। और एक बार जब पात्रता आ जाती है तब फिर लक्ष्मी भी दूर नहीं रहतीं। अर्थात पात्रता से धन की प्राप्ति होती है। पर क्या एक बार जब धन की प्राप्ति हो गयी तो उसीसे सुख की प्राप्ति हो जाएगी? इस प्रश्न का उत्तर बड़ा दिलचस्प है। सूत्र कहता है कि धन से धर्म तथा धर्म से सुख की प्राप्ति होती है। अर्थात मात्र धन प्राप्त हो जाने से सुख भी चला आएगा, ऐसा नहीं है। सुख की प्राप्ति का रास्ता है धार्मिक आचरण। 

                                                       
                               
  • उपरोक्त सूत्र कई तरह के प्रश्न उठाते हैं। सबसे पहले विद्या क्या है ?   क्या शिक्षा (Education) विद्या है ? अवश्य हीं शिक्षा विद्या का एक सबसे बड़ा माध्यम है। ज्ञान (Knowledge), लिखना (Writing), पढ़ना (Reading), सीखना (Learning), निपुणता (Skill), चेतना (Awareness), विवेक (Wisdom), निर्णायक क्षमता (Ability to judge) इन सारी चीजों का सम्मिलित रूप है विद्या; और इस में किसी को कोई शक नहीं होनी चाहिए कि इन सारी चीजों को प्राप्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है शिक्षा । एक व्यक्ति कि बुद्धि (Intelligence) कम ज्यादा हो सकती है पर शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा एक कम बुद्धि का व्यक्ति भी अपने क्षेत्र में निपुणता प्राप्त कर सकता है क्योंकि उसकी बुद्धि एक क्षेत्र मे भले कम हो पर दूसरे क्षेत्र में ज्यादा हो सकती है।   


  • दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न है - विनय क्या है ? क्या विनय का मतलब विनम्रता से है? उत्तर है - हाँ । विनय का मतलब है, मर्यादित आचरण, शिष्टता, शालीनता, सभ्यता एवं सबसे महात्वुर्ण बात ये जिसमें अहंकार न हो, जो अपनी बात थोपने की बजाय दूसरों की बातें ध्यान से विनम्रता पूर्वक सुनने की क्षमता रखता हो। तो क्या विद्या विनम्रता प्रदान करती है ? उत्तर है - हाँ भी और ना भी । कहते है विद्या अर्थात ज्ञान से परिपूर्ण व्यक्ति सागर की तरह धीर, गंभीर एवं विनम्र हो जाता है । दूसरी तरफ एक और कहावत है - " अध जल गगरी छलकत जाए" । अर्थात जिस घड़े मे पानी कम होता है वो ज्यादा छलकता है । स्पष्ट है विद्या एक व्यक्ति को विनम्र भी बना सकता है और अहंकारी (Arrogant) भी । कम या ज्यादा शिक्षित, दोनों ही तरह का व्यक्ति विनम्र या अहंकारी हो सकता है । ज़्यादातर यह निर्भर करता है व्यक्ति के पालन पोषण एवं उसे प्रदत्त संस्कारों पर । अन्य कारण भी हो सकते हैं । पर कारण जो भी हो, इतना तो तय है कि यदि व्यक्ति में अहंकार आ गया तो वह अपनी सीखने कि क्षमता खो देता है। सीखना एक सतत प्रक्रिया है। अहंकार इस सीखने कि क्षमता का हरण कर लेता है। दूसरी तरफ यदि उसमें विनम्रता आती है तो अवश्य ही उस व्यक्ति में सीखने की क्षमता तथा उस क्षमता का प्रयोग कर धन कमाने की उसकी पात्रता कई गुना बढ़ जाएगी। 


  • तीसरा महत्वपूर्ण प्रश्न - पात्रता क्या है ?  क्या पात्रता का तात्पर्य धन कमाने की योग्यता से है ?   उत्तर है - हाँ । पात्रता का अर्थ है योग्यता । विद्या विनम्रता प्रदान करती है तथा एक विनम्र व्यक्ति धन कमाने की योग्यता ज्यादा अच्छी तरह हासिल कर सकता है। इस विंदु पर विद्या, विनम्रता एवं पात्रता अर्थात योग्यता तीनों ही एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं। अर्थ शास्त्र कहता है कि इस दुनिया में जितने भी सक्षम लोग किसी न किसी कार्य में कार्यरत हैं, उनका मूल उद्देश्य धन कमाना ही है, क्योंकि धन ही वो माध्यम है जिसके द्वारा वे अपनी आवश्यकताओं कि पूर्ति कर सकते हैं। कहना न होगा कि धन कमाने की योयता या पात्रता का कितना बड़ा महत्व है। 


                                                       
                                                               




  • अब आते हैं अगले प्रश्न पर जो संबन्धित है - धन प्राप्ति से । क्या पात्रता या योग्यता आजाने मात्र से धन की प्राप्ति हो जाएगी ? उत्तर है - नहीं । समाज में ऐसे व्यक्तियों कि कमी नहीं जो बहुत ही ज्यादा पढे लिखे, बहुत विद्वान हैं, फिर भी उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं। इसका उत्तर ये है कि सिर्फ योग्यता प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं, जब तक प्राप्त योग्यता को योग्यता अनुरूप काम मे उपयोग न किया जाए, धन की प्राप्ति नहीं हो सकती। पर जिस व्यक्ति के पास पात्रता ही नहीं है, उसके द्वार लक्ष्मी कैसे आ सकती हैं ? मैं ऐसे कई व्यक्तियों को जनता हूँ जो मात्र शिक्षा (विद्या) के बल पर, न सिर्फ अपना बल्कि अपने पूरे परिवार को झोपड़पट्टी से निकालकर आर्थिक संपन्नता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम हुए हैं। सच पुछो तो गरीबी से लड़ने का सबसे धारदार हथियार है - विद्या । विद्या ही समृद्धि का द्वार है ।  

  • अगला प्रश्न है - धर्म क्या है ? धन से धर्म ऐसा क्यों कहा गया है ? यहाँ मैं धर्म क्या है इस पर किसी लंबे चौड़े बहस मे नहीं पड़ना चाहता, क्योकि इस विषय पर हजारों हजार पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं और आगे भी लिखी जाती रहेंगी। बस इतना कहना चाहता हूँ कि हरेक धर्म में, चाहे वो हिन्दू धर्म हो या इस्लाम या क्रिश्चियन, कुछ बातें समान हैं। जैसे - हर इंसान ईश्वर का ही प्रतिरूप है, अत: हरेक इंसान से प्यार करो, गरीबों की मदद करो, जहां तक बन सके दुखी, लाचार, रोगग्रस्त, पीड़ितों की सेवा करो, धर्म अनुरूप आचरण करो आदि आदि । किसी लाचार, पीड़ित या गरीब की मदद करने पर जो एक आंतरिक संतोष या सुख प्राप्त होता है, वह अवर्णणीय है, इसे मदद करने के बाद प्राप्त होने वाली अनुभूति के द्वारा ही जाना जा सकता है । मदद तीन तरह से की जा सकती है। या तो शरीर से या धन से या शरीर और धन दोनों से। हर व्यक्ति को ईश्वर का प्रतिरूप समझना, जो लोग आर्थिक या शारीरिक कष्ट में हों तो उनकी मदद करना यदि धर्म है, तो निश्चय हीं धन का रोल सहायता करने की इस पूरी प्रक्रिया में बहुत हीं महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि एक व्यक्ति के पास यदि धन नहीं है तो आर्थिक कष्ट में पड़े एक दूसरे व्यक्ति की मदद वह कैसे करेगा ? इसीलिए लगभग सभी धर्मों में अपनी आय का कुछ हिस्सा गरीबों में दान करने, समाज के दबे कुचलों की सहायता करने का मार्ग सुझाया गया है ।" धनात् धर्मम् " का परिप्रेक्ष्य यही है । अवश्य ही धन से धर्म की प्राप्ति की जा सकती है। 

  • अब आते हैं इस प्रश्न पर की सुख क्या है ? क्या धन से सुख की प्राप्ति होती है ? सुख क्या है - इसकी व्याख्या करना थोड़ा जटिल तो है पर मोटे तौर पर हम यह कह सकते हैं कि सुख एक ऐसे मानसिक अवस्था का नाम है जिसमे व्यक्ति हंसी, खुसी, आनंद, सौभाग्य, कल्याण, आत्मिक संतुष्टि जैसे भावों की अनुभूति करता है । यह बात सही है की मात्र धन प्राप्त कर लेने से व्यक्ति सुखी हो जाएगा ऐसा नहीं है क्योंकि सुख प्राप्ति का स्रोत मात्र धन नहीं है। धन के अलावा भी ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जो उसे सुखी बनाती हैं । किसी व्यक्ति ने कोई परीक्षा प्रथम श्रेणी मे पास कर लिया, किसी रोड पर पड़े लाचार व्यक्ति की सहायता कर दिया, किसी को बेटे की चाहत है और बेटा हो गया, किसी की बेटी ने सारे लड़कों को पीछे छोड़ टेनिस में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत लिया, किसी डूबते व्यक्ति को किसी पुलिस के जवान ने बचा लिया - ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जिनसे सुख के भाव की अनुभूति होती है। एक दूसरे की मदद करना, अपने मेहनत के बल कुछ प्राप्त कर लेना, अपने बच्चों, परिवार या समाज के लिए कुछ त्याग करना आदि ऐसे कई कार्य हैं, जिनमें धन की आवश्यकता नहीं होती, फिरभी ऐसा कर लेने पर एक आत्मिक संतुष्टि, एक आंतरिक सुख की अनुभूति होती है।  
  • पर दूसरी ओर यह भी सत्य है कि धन सुख की प्राप्ति का एक बहुत बड़ा साधन है। धन की महत्ता इसलिए है क्योंकि यही वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपनी सारी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। रोटी, कपड़ा, मकान से लेकर गाड़ी, बंगला और आसमान में उड़ान तक बिना धन के नहीं हो सकता। धन आपके  छोटे छोटे सपनों, जैसे अच्छा खाना, अच्छा पहनना, अपना एक घर हो, अपनी एक गाड़ी नहीं तो कम से कम एक मोटर साइकिल हो, और ना जाने कितने ही ऐसे छोटे छोटे सपनों को वास्तविकता की धरातल पर उतारकर, उन सपनों को खुसियों मे परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। अत: इसमें कोई दो राय नहीं कि धन से सुख की प्राप्ति होती है।  

सारांश : 
दुनिया में ऐसे लाखों गरीब हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं । ऐसे लाखों करोड़ो लोग, जो गरीबी से जूझ रहे हैं, उनकी मुक्ति का एक मात्र मार्ग है - शिक्षा, क्योंकि इसी मार्ग से वे धन प्राप्ति के द्वार तक पहुँच सकते हैं। इतिहास गवाह है की जो राष्ट्र लक्ष्मी अर्थात् धन की आराधना नहीं करते, धन कमाने को हीन भावना से देखते हैं, वे राष्ट्र कभी विकास की उचाइयों को छू नहीं पाते। अत: लक्ष्मी की आराधना आवश्यक है । पर ध्यान रहे लक्ष्मी तक पहुंचने का रास्ता विद्या की देवी माँ सरस्वती के दरवाजे से शुरू होती है । सरस्वती की आराधना के बिना लक्ष्मी तक पहुंचना अत्यंत कठिन है । विद्या का तात्पर्य सिर्फ साहित्य, दर्शन, कला, विज्ञान, वाणिज्य, तकनीक आदि का किताबी ज्ञान नहीं है । इनमें निपुणता के अलावा अपने पेशा या कर्म से संबन्धित हर तरह की जानकारी प्राप्त करना, विभिन्न विषयों की सूचनाएँ, सामान्य ज्ञान, व्यावहारिक बुद्धि आदि भी विद्या के हीं अविभाज्य अंग हैं। इनमें से कौन सी सूचना या ज्ञान कब किस तरह लाभ पहुंचा दे, कोई नहीं जनता । अत: अपने दिमाग की खिड़की एवं दरवाजे हर वक्त खुली रक्खें, ज्ञान तथा सूचनाओं की तरंगें जो हर वक्त प्रवाहित होती रहती हैं, उन्हें लौटने ना दें, आगे बढ़कर  ग्रहण करें । यही है विद्या की देवी की सच्ची आराधना । गरीबी से मुक्ति का मार्ग भी यही है ।
                                              विद्या ही समृद्धि एवं सुख दोनों का द्वार है । 

                                                                                                                                              ***