गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

कल हीं की बात है

 

कविता 

                                                    कल हीं की बात है 

-- जगदीश प्र. गुप्ता  



मेरे प्यारे बेटे ,

तुम्हारा ये जन्म दिन 

जाने क्यों ले चला है मुझे 

आज फिर ,

यादों की उन सुनहरी गलियों मे जहां

तुम मिले थे हमे 

दुनिया की सभी चाहतों से बढ़कर 

ईश्वर के एक खूबसूरत वरदान की तरह । 


सूरज तो निकलता है रोज हीं

पर जाने क्या बात थी उस सुबह में

एक अजीब सा एहसास, रहस्य, खामोशी 

जैसे कुछ कहने को हो बेताब कानों में । 


बीतते हर पलों के साथ हीं 

बढ़ता रहा एक भय , एक बेचैनी

हर ओर एक अफरातफरी , भागते कदम 

कानों में गूँजते हैं आज भी 

वो फुसफुसाते स्वर , बेरहम । 


वेदना के वे मरमान्तक क्षण 

उड़ेलते हैं आज भी कानों में अग्नि-कण

सांसें चलती तो थी पर , सहमी सहमी

हवाएँ भी थीं कुछ बेदम , रुकी रुकी


सृष्टि का वो सबसे पहला शब्द , क्यां क्यां


तभी नैपथ्य से उठा एक नाद स्वर

हृदय के तारों पर छेड़ता एक  राग मधुर

सृष्टि का वो सबसे पहला शब्द , क्यां क्यां

धरा के गर्भ से ज्यों फूटता है , अंकुर नया


एक झटके में अचानक , सब कुछ बादल गया

सांसें जो थीं खामोश , रुकी रुकी 

फिर से मचल पड़ीं ;

घड़ी घण्ट के ताल पर 

हवाएँ थिरक उठीं । 

पहन घुँघरू पावों में अपनी 

खुशियाँ  यूं नाचीं ,

सारा अंबर झूम उठा ।

बधाई हो , बेटा हुआ है 

और इस तरह तुम आए 

बधाइयों  के  बीच 

अपनी माँ के आँचल में । 

                                                            

 

छोटे छोटे हांथ , छोटे छोटे पैर 
नर्म रुई के फाहे सा बदन , रेशमी 

काली काली आँखें , अधखिली नन्ही सी 

भुला नहीं हूँ मैं , आज भी 

वो पहली कोशिश , पहचानने की ।  


वो पहली कोशिश , पहचानने की ।  


 

  

मेरे प्यारे बेटे ,

आज तुम  बड़े हो चुके हो

दुनिया के समर मे खड़े हो चुके हो 

फिर भी लगता है जैसे , 

कल हीं की बात हो  । 


उठे ये हांथ हमारे 

मांगती हैं दुआएं 

हर वो सपने , जो कभी देखे थे तुमने 

दामन में तुम्हारे , सिमट सिमट जाएँ 

नाचे खुशियाँ , आँगन मे तेरे

दुख की कभी कहीं , बदली न छाए ।


तुम्हारा ये जन्म दिन 

हर पल , हर छिन 

बने ऐसे ही एहसासों का गुलशन 

सफलताओं के हजार फूल खिलें 

ज्ञान के दीप जलें

हों वारिश खुसियों की

भींगे तन मन । 

                                                                 

***** 


                                                                                                                                   


8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छा कविता हैं।दिल को छूने वाला।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. Thank you. पर कब तक Unknown बने रहेंगे। कृपया अपना परिचय दें।

      हटाएं
  2. Wah..babut sundar and marmik.
    Very well written, expressed. I m sure all parents will love this

    जवाब देंहटाएं
  3. All about emotions and realy expressed like live showing very nice writing

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद दीपकजी। आपकी टिप्पणीयां मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, आग्रह है कृपया इसी तरह प्रेरित करते रहें।

      हटाएं
  4. ये कविता बहुत भावनात्मक हैं।

    जवाब देंहटाएं