सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

हेंह, हेंह मोदी ने आखिर किया क्या है ? (पार्ट-2) Achievements Of Modi Govt. in 16 Months

                                                                                                                     ( गतांक से आगे )                                    देश में गरीबों के लिए पहली बार :                                                                        कवच, कौशल और कर्ज तीनों एक साथ        


पिछले अंक मे आपने पढ़ा मोदी की कुछ असाधारण एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां, इस अंक मे प्रस्तुत है मोदी द्वारा गरीबों एवं निम्न आय वर्ग के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उठाए गए कुछ कदम। मोदी ने गरीब तथा निम्न आय वर्ग के लोगों को तीन तरह का सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। दो बीमा योजनाएँ एवं एक पेंशन योजना। इसी तरह उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए मोदीने दो अति महत्व पूर्ण हथियार उनके हाथों मे सौंपा है । प्रथम, प्रधान मंत्री कौशल विकाश एवं स्किल इंडिया योजना एवं द्वितीय, गरीबों को बिना किसी जमानत या गिरवी रक्खे कर्ज देने के लिए, मुद्रा बैंक योजना। इस अंक में प्रस्तुत है इन्हीं योजनाओं पर एक सरसरी नजर।    

2॰ मोदी की अति विशिष्ट योजनाएँ एवं उपलब्धियां :
भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ की किसी प्रधान मंत्री ने गरीबों को भी पेन्सन मिलना चाहिए, उनके भी जीवन का बीमा होना चाहिए ताकि असमय मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को कुछ सहारा मिल सके एवं उन्हें भी अचानक कोई दुर्घटना हो जाए जिसमे उसकी मृत्यु हो जाती है या अपंग हो जाए, तो उसे भी कुछ आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिये, ऐसा  न सिर्फ सोंचा बल्कि इस सोंच को वास्तविकता के धरातल पर उतारा   भी । इस तरह की बीमा योजनाएँ व्यापारिक रूप से पहले से ही कई संस्थाओं जैसे भारतीय जीवन बीमा निगम एवं अन्य सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियां चला तो रही हैं, पर इनमें प्रीमियम का दर इतना ज्यादा है कि ज्यातर गरीब, यहाँ तक की मध्य वर्ग का भी एक बहुत बड़ा तबका इसका लाभ नहीं उठा पाता। मोदी सरकार ने इसी वर्ग को लक्ष्य मानकर गरीबों तथा आर्थिक रूप से पिछडों को भी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा कवच देने के लिए निम्न लिखित तीन योजनाओं का शुभारंभ किया है। इन 3 योजनाओं मे पहली, एक आम आदमी को मात्र 330 रु॰ सालाना मे जीवन बीमा प्रदान करती है, दूसरी, मात्र 12 रु॰ सालाना मे दुर्घटना बीमा प्रदान करती है और तीसरी, एक आम नागरिक को भी उसके 60 वें वर्ष से पेंशन प्रदान करती है।  कहना न होगा, शुरू होते ही ये तीनों योजनाएँ जबर्दस्त सफलता हासिल कर रही हैं। 

1. प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना : 

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इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच है, मात्र 330 रुपये प्रति वर्ष के भुगतान पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा प्राप्त कर सकता है। अर्थात बीमा कराये गए अवधि के बीच मे यदि उसकी मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को 2 लाख रुपये प्राप्त होंगे। परंतु इस योजना का लाभ उठाने के लिए शर्त यह है कि आपका जन धन योजना के तहत बैंक में खाता होना चाहिए और आपके खाते से प्रीमियम की रकम स्वत: काट ली जाए इसकी सहमति देनी होगी। इसका मतलब यह हुआ की जन धन योजना के तहत खोले गए बैंक खाते को आप जीरो बैलेंस पर नहीं रख पाएंगे। उस खाते को चालू रखना जरूरी है। कहना न होगा कि इतने कम रकम में गरीबों तथा आर्थिक रूप से पिछड़ों को जीवन सुरक्षा प्राप्त कराना मोदी सरकार का एक उललखनीय ऐतिहासिक कदम है।   
                                        
2॰ प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना :

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एक मजदूर, जो संगठित क्षेत्र के किसी बड़े उद्योग या कल कारखाने में काम करता है, यदि उसकी दुर्घटना में मौत हो जाए या वह अपंग हो जाए तो उसे कल कारखाने से संबन्धित सुरक्षा अधिनियमों के तहत कई तरह के लाभ एवं क्षति पूर्ति प्राप्त करने का हक है, पर असंगठित क्षेत्र का एक गरीब मजदूर जो किसी बिल्डर का ऊंचा मकान बना रहा है, यदि गिरकर उसकी मौत हो जाए या अपाहिज हो जाए तो उसे क्या मिलेगा। कुछ नहीं सिवाय सांत्वना या बहुत हुआ तो कुछ रुपयों की मदद के सिवा। इन्हीं असंगठित क्षेत्र के गरीब मजदूरों को ध्यान में रख कर प्रधान मंत्री सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है।
इस योजना के तहत मात्र 12 रुपये सालाना देकर कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र मे काम करता हो, इस योजना का लाभ उठा सकता है, वशर्ते उसकी उम्र 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इस योजना के तहत यदि उस व्यक्ति की मृत्यु किसी दुर्घटना वश हो जाती है या उस दुर्घटना के कारण वह पूरी तरह अपंग एवं काम करने लायक नहीं रह जाता, तो 2 लाख रुपये तथा यदि आंशिक रूप से अपंग हो जाता है तो 1 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। कहना न होगा कि गरीबों की सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना महत्व पूर्ण कदम है, क्योंकि 12 रुपए की रकम इतनी छोटी रकम है कि एक अत्यधिक गरीब भी इस रकम को आसानी से दे सकता है। 

3. अटल पेन्शन  योजना : 
किसी ने कल्पना किया था कि एक गरीब भी 60 साल के बाद रिटायर होने पर पेंशन प्राप्त कर सकता है। मोदी सरकार ने गरीबों को भी बुढ़ापे में एक सुरक्षा कवच मिले, इस उद्देश्य से अटल बिहारी बाजपेयी जी के नाम पर इस योजना का नामकरण एवं शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 से 40 के बीच है, इस योजना का लाभ उठा सकता है, पर शर्त यह है कि (1) वह पहले से ही ऐसे ही किसी सवैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य नहीं होना चाहिए, (2) तथा वह इन्कम टैक्स दाता नहीं है, अर्थात उसकी आय इतनी नहीं है कि वह इन्कम टैक्स दे सके। इस योजना में शामिल होने पर सरकार के तरफ से प्रति वर्ष उस व्यक्ति द्वारा दिये गए अंश दान का 50% या 1000 रुपया जो भी कम होगा,उतनी राशि सरकार द्वारा सहायता के रूप में दी जाएगी। यह सहायता सरकार द्वारा 5 वर्षों तक दी जाएगी , अर्थात 2015-16 से शुरू होकर 2019-20 तक, परंतु यहाँ भी एक शर्त यह है कि यह सहायता उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो लोग 2015 दिसंबर तक इस योजना मे सम्मिलित हो चुके होंगे। 
   
                                                                               
                                                                                 
इस योजना के तहत सम्मिलित होने वाले व्यक्ति को जब वह 60 साल का हो जाएगा, तब प्रति माह 1000, 2000, 3000, 4000 या 5000 तक की रकम लाभार्थी को पेंशन के रूप में प्राप्त होगा। यह उस व्यक्ति की आर्थिक क्षमता पर निर्भर है कि वह कितने का पेंशन लेना चाहता है ,क्योकि ज्यादा पेंशन लेने के लिए ज्यादा रकम देना होगा, पर राहत की बात यह है कि सरकार हरेक वर्ष 50% या 1000 तक की सहायता 5 वर्षों तक करती रहेगी। इसके साथ ही अंशदान की रकम इस बात पर भी निर्भर होगी कि वह व्यक्ति किस उम्र में इस योजना मे शामिल हो रहा है। उदाहरण के लिए यदि एक 35 वर्ष का व्यक्ति प्रति माह 5000 रुपये पेंशन के रूप में प्राप्त करना चाहता है तो उसे 902 रु॰ प्रति वर्ष अंशदान के रूप मे 25 वर्षों तक देना होगा। पर यदि वह 18 वर्ष की उम्र मे ही इस योजना मे सम्मिलित होता है तो उसे मात्र 219 रु॰ प्रति माह देने होंगे पर यह रकम उसे 42 वर्षों तक देना होगा। । पेंशन की रकम लाभार्थी को अवश्य मिलेगी, इसकी गारंटी सरकार लेती है। 
उपरोक्त तीनों ही योजनाएँ सुपर डुपर हिट रही हैं तथा लोगों मे इन योजनाओं का लाभ उठाने की होड लग गई है। सितंबर 2015 तक के उपलब्ध डाटा अनुसार अबतक प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना मे 2 करोड़ 83 लाख, प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना मे 8 करोड़ 68 लाख एवं अटल पेंशन योजना मे 7लाख 80 हजार लोग शामिल हो चुके हैं। इन तीनों योजनाओं मे सम्मिलित लोगों की कुल संख्या सितंबर 2015 तक 11 करोड़ 58 लाख तक पहुँच चुकी थी।  

4॰  प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना एवं स्किल इंडिया योजना :   
2014 के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 37 करोड़ लोगों की उम्र 10 से 24 वर्ष के बीच है और जैसा कि मोदी बार बार अपने भाषणों मे कहते रहे हैं देश मे पूरी जनसंख्या का 65% युवा वर्ग का है। इतनी बड़ी युवा शक्ति को यदि अच्छी तरह विभिन्न उद्योग, व्यापार एवं तकनीक से संबन्धित ज्ञान एवं कौशल की शिक्षा दी जाए, उनमे छिपे हुनर का विकास किया जाए, तो इस योजना से न सिर्फ विभिन्न उद्योगों को उनकी आवश्यकता अनुसार यथेष्ट मात्रा मे कारीगर मिल जाएंगे बल्कि बड़ी मात्र में बेरोजगारी दूर करने में भी यह मिल का पत्थर साबित होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान मे रख कर दोनों योजनाएँ शुरू की गई हैं। 
प्रधान मंत्री कौशल विकाश योजना के तहत ऐसे युवक जो कक्षा 10 या 12 मे असफल हो गए, आगे नहीं पढ़ सके या जो निम्न आय वर्ग से आते हैं, ऐसे 24 लाख युवकों को विभिन्न प्रकार के कौशल या हुनर में प्रशिक्षित करने की योजना है।  ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद ऐसे युवकों की परीक्षा भी ली जाएगी एवं उस परीक्षा मे प्राप्त परिणाम अनुसार योग्यता प्राप्ती का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा, ताकि उस सर्टिफिकेट के आधार पर वह नौजवान रोजगार प्राप्त कर सके। इसके अलावा असाधरन योग्यता प्रदर्शित करने वाले युवकों को 8000 रुपए की पुरस्कार राशि भी दी जाती है। 

                              

स्किल इंडिया का उद्देश्य एवं कार्यक्रम का पैमाना दोनों प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना की तूलना मे बहुत बड़ा है। इस योजना का लक्ष्य 2020 तक भारत के एक एक गाँव तथा शहर तक पहुंचाना तथा इनमें रह रहे कम से कम 50 करोड़ युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे न सिर्फ भारत बल्कि जर्मनी, जापान, चीन, अमेरिका तथा विश्व के अन्य देशों के तकनीकी क्षमता से सम्पन्न कारीगरों की मांग की भी आपूर्ति कर सकें। इस योजना के तहत दिया जाने वाला कौशल प्रशिक्षण न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर बल्कि नवीनता की खोज आधारित भी होगा। प्रशिक्षण कोर्स बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रक्खा गया है कि देश में तथा विदेशों मे भी किस तरह के कारीगरों की ज्यादा मांग है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद चाहें तो ये युवा अपने खुद का कारख़ाना या अन्य व्यापार भी शुरू कर सकेंगे क्योकि इन्हें एक सफल उद्द्यमी बनने के गूढ रहस्य की भी शिक्षा दी जाएगी।  कहना न होगा कि ये दोनों ही योजनाएँ देश मे बेरोजगारों कि बढ़ती संख्या को कम करने मे महत्व पूर्ण भूमिका अदा कारेगी। 

5॰  मुद्रा बैंक  Micro Units Development & Refinance Agency :   
    ( गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे महत्व पूर्ण ब्रह्मास्त्र )

देश मे यह पहली बार हुआ है कि गरीबों तथा निम्न आय वर्ग के लोगों को आर्थिक सुरक्षा कवच, कौशल प्रशिक्षण तथा कर्ज तीनों एक साथ दिया जा रहा है। कौशल प्राप्त हो जाने के बाद, एक युवा निवेशक यदि अपने खुद का कोई उदद्योग या व्यापार शुरू करना चाहे तो उसे बिना किसी बाधा के बैंकों से कर्ज मिलना जरूरी है। न सिर्फ युवा उद्द्यमी बल्कि देश मे ऐसे करोड़ो करोड़ लोग हैं, जो छोटे छोटे व्यापार या उदद्योग मे लगे हुए हैं,पर लगभग रोज हीं अपने कर्ज की आवश्यकताओं के लिए बैंकों के पास न जाकर, सूदखोर साहूकारों (Money lenders) से बहुत ही ऊंचे व्याज दर पर कर्ज लेकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति कर रहे हैं। सब्जी

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बैंचने वाला, ठेला लगाने वाला, गलियों मे फेरि लगाने वाले, चाय का स्टाल चलाने वाले,अपना रिक्शा या ऑटो रिक्शा चलाने वाले, महिलाएं जो सिलाई या बियूटी पार्लर चलना चाहती हैं, ऐसे करोड़ो लोग हैं जिन्हे देश के बैंकिंग प्रणाली से कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं मिलता और इसमे जो सबसे बड़ा कारण है वो है - बैंकों द्वारा बिना जमानत के कर्ज न देना। मजबूरन छोटे छोटे धंधों मे लगे ये लोग, साहूकारों से ऊंचे व्याज पर कर्ज मिलने के बावजूद उन्हीं के पास जाने को मजबूर हैं क्योंकि साहूकार उनसे जमानत नहीं मांगते । नतीजा यह होता है कि वो जो भी कमाते हैं, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा सूदखोरों के पास चला जाता है और उनकी दयनीय स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है।  मोदी सरकार ने इसी वर्ग की जरूरतों को ध्यान मेँ रख मुद्रा बैंक की स्थापना की है। अंग्रेज़ी मे इस बैंक का नाम है : Micro Units Development & Refinance Agency । अँग्रेजी के इन्हीं शब्दों के प्रथम अक्षर को जोड़ कर नाम पड़ा है - मुद्रा बैंक। 

                                 

यह बैंक देश मे पहले से ही स्थापित सिडबी (small Industries Development Bank of India ) एसआईडीबीआई के सब्सिडियरी के रूप मे काम करेगा। प्रधान मंत्री मोदीजी ने 8 अप्रैल 2015 को इस योजना का  प्रारम्भ 20,000 करोड़ की प्राथमिक पूंजी से किया था। इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य है गांवों, सुदूर पिछड़े क्षेत्रों मे रहने वालों तथा निम्न आय वर्ग के ऐसे लोग जो देश की बैंकिंग व्यवस्था के लाभ से वंचित हैं, उन लोगों तक बैंको से मिलने वाली सारी सुविधाएं जैसे,विभिन्न तरह की बीमा योजनाएँ एवं कम व्याज दर पर, बिना किसी स्थायी संपत्ति जमानत में रक्खे, विभिन्न प्रकार के अति लघु उदद्योगों या व्यापार के लिए कर्ज मुहैया कराना । इस योजना के तहत तीन तरह का कर्ज देने की व्यवस्था की गई है। 
1॰ शिशु ऋण     :              50,000 तक की रकम ।
2. किशोर ऋण  :         50,000 से 5 लाख तक की रकम । 
3. तरुण ऋण    :             5 लाख से 10 लाख तक । 
भविष्य में इस योजना के तहत मुद्रा कार्ड देने, क्रेडिट गारंटी एवं क्रेडिट में वृद्धि आदि का भी प्रावधान करने की संभावना है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मार्च 2016 तक 2 करोड़ जरूरतमन्द लोगों को उनके उदद्योग, व्यापार में निवेश के लिए 1.22 करोड़ रुपये कर्ज के रूप मे देने का लक्ष्य है। इस योजना की सफलता के लिए प्रधान मंत्री स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं। देश के विभिन्न बैंकों ने अप्रैल से अबतक लगभग 22लाख लोगों को 29,000 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दे चुके हैं तथा इस रकम मे से करीब 9,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने वालों के बीच वितरण भी किया जा चुका है। इस योजना की सफलता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुत बड़ी मात्र मे महिलाएं भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आ रही हैं। कोई ब्यूटी पार्लर के लिए, तो कोई भैस खरीदने के लिए, तो कोई ट्यूशन सेंटर खोलने के लिए, बड़े पैमाने पर महिलाओं को भी इस योजना मे काम शुरू करने की प्रेरणा मिल रही है। इसी तरह अति छोटे छोटे व्यापार मे लगे लोग, जैसे सब्जी बेचने वाले, ठेला पर सामान बेचने वाले, चाय का स्टाल लगाने वाले आदि भी बड़ी मात्रा मेँ इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। 2013 मे किए गए एक सर्वे के अनुसार देश मे लगभग 5.70 करोड़ ऐसे लघु उद्द्यमी तथा छोटे व्यापारी हैं, जिन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने मेँ अत्यधिक कठिनाई होती है, क्योंकि बैंक बिना किसी जमानत के कर्ज देना नहीं चाहते। उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं दिया गया कर्ज डूब न जाए। मुद्रा बैंक इसी समस्या का समाधान लेकर आया है तथा अब बिना किसी जमानत के ऐसे करोड़ों अति लघु तथा लघु व्यापारियों, उद्द्यमियों को कर्ज मिलना  आसान हो गया है, जो पहले बैंकों से कर्ज न मिल पाने के कारण सूदखोरों तथा  साहूकारों पर आश्रित थे।
उपरोक्त पांचों योजनाओं को यदि संयुक्त रूप से देखा जाए तो इसमे कोई शक नहीं कि आने वाले भविष्य में ये भारत का चेहरा बदलने वाली योजनाएँ सिद्ध होंगी । ये योजनाएं भारत से गरीबी मिटाने, बड़ी मात्रा मे गरीबों को आत्म निर्भर बनाने एवं देश से बेरोजगारी हटाने में मील का पत्थर साबित होंगी। 
                                                                                                 
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